लाहौर मे जन्मे इस बॉलीवुड एक्टर ने चालिस के दशक मे फिजिक्स मे एमएससी किया था।

 लाहौर मे जन्मे इस बॉलीवुड एक्टर ने चालिस के दशक मे फिजिक्स मे एमएससी किया था।


WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: June 27, 2024, 12:30 PM IST

एक्टर मनमोहन कृष्णा 

इनके बेटे डॉक्टर राम चड्ढा एक फेमस स्पाइन सर्जन है जो की मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल मे पदस्थ है।

बॉलीवुड में अपनी खास पहचान रखने वाले मशहूर अभिनेता और डायरेक्टर मनमोहन कृष्ण से भला कौन वाकिफ नहीं होगा. दिवंगत एक्टर मनमोहन कृष्ण का जन्म 26 फरवरी साल 1922, में हुआ था.

लाहौर (पाकिस्तान) में जन्मे निर्देशक ने अपने करियर की शुरुआत बतौर एक्टर 'अंधों की दुनिया' से की थी. मनमोहन कृष्ण बहुमुखी प्रतिभा के धनी माने जाते थे. उन्होंने उम्दा एक्टर होने के साथ ही बेहतरीन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर फिल्मी इंडस्ट्री में अपना अलग मुकाम हासिल कर लिया था. हालांकि उनके बारे में ये बहुत कम लोग जानते हैं कि मनमोहन एक्टर या प्रोड्यूसर नहीं बल्कि बॉलीवुड में बतौर सिंगर अपनी पहचान बनाना चाहते थे.

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. मनमोहन कृष्ण सिंगर ने सिंगर नहीं बल्कि एक एक्टर से डायरेक्टर तक का सफर तय किया. फिल्मी इंडस्ट्री में मनमोहन की शुरुआत 1947 में फिल्म 'अंधों की दुनिया' से हुई थी. इस फिल्म में उन्होंने एक गाने में अपनी आवाज भी दी थी. पहली ही फिल्म में मनमोहन के एक्टिंग और आवाज दोनों की ही जमकर तारीफ की गई थी.  

एक्टिंग में अच्छा मुकाम हासिल करने के बाद मनमोहन कृष्ण ने 1980 में बतौर डायरेक्टर फिल्म 'नूरी' से शुरुआत की थी. इस फिल्म को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया था. आपको बता दें कि मनमोहन ने हिंदी में ही नहीं बल्कि पंजाबी फिल्मों में भी चार दशकों तक काम किया है. साथ ही उन्होंने 250 से अधिक फिल्मों में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा है.  

इन फिल्मों से बनाई खास पहचान

आपको बता दें कि मनमोहन कृष्ण ने अपनी शानदार एक्टिंग की वजह से उन्होंने कई सारी फिल्मों के अवार्ड भी जीते हैं. 'जिंदगी जीने के लिए' (1984), 'नूरी' (1979), 'विजय' (1988), कंवरलाल' (1988), 'ऐसा प्यार कहां' (1986), 'युद्ध' (1985) जैसी कई फिल्में मनमोहन के करियर की हिट फिल्में हैं. 

फिल्मी दुनिया मे आने से पहले कॉलेज मे प्रोफेसर थे 

मनमोहन कृष्ण के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि इस इंडस्ट्री में आने से पहले वह एक कॉलेज में प्रोफेसर थे. दो साल तक कॉलेज में पढ़ाने के बाद उन्होंने बॉलीवुड जगत की तरफ रुख किया था क्योंकि हमेशा से वह एक सिंगर बनना चाहते थे. लेकिन किस्मत ने उन्हें एक सफल एक्टर और डायरेक्टर बना दिया. इसी के साथ 3 नवंबर साल 1990 में दिग्गज एक्टर मनमोहन कृष्ण का निधन हो गया था. 

मनमोहन कृष्ण का फिल्मी सफरनामा
















एक्टर मनमोहन कृष्ण के बेटे मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल एक ऑर्थो सर्जन है।


डॉ. राम चड्ढा, एमबीबीएस, एमएस (ऑर्थोपेडिक्स), एक सलाहकार स्पाइन सर्जन हैं। उन्होंने एल.टी.एम. से ऑर्थोपेडिक्स में अपना प्रशिक्षण पूरा किया। 1989 में मेडिकल कॉलेज और जनरल हॉस्पिटल, सायन, मुंबई और अपने मूल संस्थान में ऑर्थोपेडिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने का अपना जुनून जारी रखा। उन्होंने फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और यूएसए में ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन सर्जरी में कई उन्नत फेलोशिप पूरी कीं। डॉ. राम चड्ढा स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में 30 वर्षों के समृद्ध अनुभव के साथ आते हैं और देश के विभिन्न अस्पतालों से जुड़े रहे हैं। पढ़ाने की उनकी प्रतिभा ने उन्हें के.जे. में ऑर्थोपेडिक्स विभाग का प्रोफेसर और प्रमुख बना दिया। सोमैया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सायन, मुंबई। वह भारत में 'MICOSS- मिनिमली इनवेसिव कॉस्मेटिक स्पाइन सर्जरी' के अग्रणी हैं और उन्होंने सदी के अंत में रीढ़ की विकृति, संक्रमण और ट्यूमर के लिए थोरैकोस्कोपिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विकसित की। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और एशिया के विभिन्न केंद्रों में अपनी कुशलता को निखारा। उन्होंने काइफो-स्कोलियोसिस और फेल्ड बैक सर्जरी के लिए उच्च स्तरीय कॉम्प्लेक्स स्पाइन इंस्ट्रुमेंटेशन का प्रदर्शन किया है, जो उन्हें भारत के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से रेफर किया गया था। 



स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान में वैज्ञानिक पत्र, संपादकीय, पोडियम प्रस्तुतियाँ और भाषण शामिल हैं। वह अपनी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक प्रेरक और प्रेरक प्रस्तुतियों के लिए वैज्ञानिक सम्मेलनों में नियमित 'मुख्य वक्ता' और 'अतिथि वक्ता' हैं। वह 'एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ऑफ इंडिया', 'बॉम्बे स्पाइन सोसाइटी' और 'बॉम्बे ऑर्थोपेडिक सोसाइटी' के पूर्व अध्यक्ष हैं। वह 'एशिया-पैसिफिक ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन' में भारत के काउंसिल सदस्य और 'एशिया-पैसिफिक स्पाइन सोसाइटी' के लिए भारत के मुख्य राष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं। उन्होंने विदेशी फ़ेलोशिप समिति में कार्य किया है और 'इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन' की केंद्र-राज्य संबंध समिति के अध्यक्ष थे। वह "एशियन स्पाइन जर्नल", "इंडियन स्पाइन जर्नल" और "मलेशियाई ऑर्थोपेडिक जर्नल" के संपादकीय बोर्ड में हैं। वह इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन "IOACON - 2020 - मुंबई" के आयोजन सचिव हैं। उन्होंने हाल ही में नवी मुंबई में "रोबोटिक स्पाइन सर्जरी" का बीड़ा उठाया है। यह पश्चिमी भारत में "मेजर रेनेसां स्पाइन रोबोट" की पहली स्थापना है। वह "सुरक्षित स्पाइन सर्जरी" के समर्थक हैं और रोगी की देखभाल और नैदानिक ​​​​पूर्णता के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

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