गया के इस हवेली से है संजय दत्त-नरगिस का संबंध, कभी जद्दनबाई के यहां सजती थी ठुमरी की महफिल
गया के इस हवेली से है संजय दत्त-नरगिस का संबंध, कभी जद्दनबाई के यहां सजती थी ठुमरी की महफिल
संजय दत्त की नानी और मरहूम अदाकार नरगिस की मां जद्दनबाई के संघर्ष की कहानी यूपी से जुड़ी है, तो वहीं उनके दबदबे और सफलताओं की कहानी बिहार के गया से जुड़ी है. जद्दनबाई की हवेली में हर शाम गीत संगीत की महफिल सजती थी.
जानकार बताते हैं कि जद्दनबाई की मां दलीप बाई तवायफ थीं. जद्दनबाई को विरासत में संगीत और नृत्य मिला था. जद्दनबाई जब नृत्य करती थीं, तो राजा-रजवाड़े मंत्र मुग्ध हो जाते थे.
जद्दनबाई का एक महल आज भी गया शहर में मौजूद है. पंचायती अखाड़ा में डायट परिसर में मौजूद यह महल जीर्ण-शीर्ण हालत में है. लेकिन, इस महल की यादें जद्दनबाई के नाम से ही चमक उठती है. गया घराने से जुड़े पंडित राजेंद्र सिजुआर बताते हैं कि जद्दन बाई को जफर नवाब से प्रश्रय मिला. जफर नवाब बड़े संगीत प्रेमी थे. यही वजह है जफर नवाब की हवेलियों के बीच में जद्दनबाई की हवेली आज भी मौजूद है, जो कि उनके द्वारा जद्दनबाई को दी गई थी.
कई प्रसिद्ध राजाओं के वंशज जद्दनबाई के महल में ठुमरी गायन और नृत्य देखने आते थे. गया में जद्दनबाई के कई साल बीते. हालांकि, समय बीतने के साथ जद्दनबाई प्रसिद्ध भारतीय गायिका और अभिनेत्री भी बनी. जद्दनबाई हुसैन भारतीय सिनेमा की पहली महिला संगीतकार रहीं.
जद्दनबाई यूपी की रहने वाली थीं. गया आने के बाद ही वह कोलकाता और मुंबई पहुंची थीं. गया में ही जद्दनबाई ने ठुमरी गायन और नृत्य में अद्भुत कला दिखाया. इसके बाद गया से ही वह कोलकाता और मुंबई पहुंची और फिर गायकी, नृत्य और अभिनय के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाई.
जद्दनबाई यूपी की रहने वाली थीं. गया आने के बाद ही वह कोलकाता और मुंबई पहुंची थीं. गया में ही जद्दनबाई ने ठुमरी गायन और नृत्य में अद्भुत कला दिखाया. इसके बाद गया से ही वह कोलकाता और मुंबई पहुंची और फिर गायकी, नृत्य और अभिनय के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाई.






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