अलवर राजस्थान का एक पुलिस अफसर जिसने बॉलीवुड मे कदम रखते ही तहलका मचा दिया..!!

 अलवर राजस्थान का एक पुलिस अफसर जिसने बॉलीवुड मे कदम रखते ही तहलका मचा दिया..!!

WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: March 02, 2024, 12:30 PM IST

जयंत (जन्म: ज़कारिया खान; 15 अक्टूबर 1915 - 2 जून 1975) एक भारतीय अभिनेता थे।  पेशावर (पाकिस्तान) मे जन्मे जयंत नामक इस अभिनेता का असली नाम जाकरिया खान था,बॉलीवुड मे आने से पूर्व ये अलवर ( राजस्थान) मे एक पुलिस अफसर थे,चुंकि ये पेशावर से थे जो कि ब्रिटिशकाल मे ही रंगमंच,कला,थिएटर,नाट्य कला का मुख्य केंद्र बन चुका था,पेशावर से अनेको फिल्म आर्टिस्ट पहले ही बॉलीवुड मे माइग्रेट कर अपना एक्टिंग का लोहा मनवा चुके थे,बस यही बात इस युवा पुलिस अफसर के दिलो दिमाग मे घर कर गयी,और ये भी मुंबई फिल्म नगरी मे चले आये,उन दिनों फिल्मे बोहोत कम बना करती थी,इसलिए काम मिलना इतना आसान नहीं था,लेकिन बॉलीवुड मे पेशावर से अनेको फिल्म आर्टिस्ट ने अपने आपको वेल इस्टेबलिश्ड कर लिया था,इसी वजह से इस युवा पुलिस अफसर का दिलीप कुमार से कांटेक्ट बना,और फिर इन्हे फिल्मो मे काम मिलने लगा ,इन्होने करीब 100 फिल्मो मे छोटे बड़े किरदार निभाए है 

आप सभी को ये जानकर आश्चर्य  होगा कि  जयंत जी  अमजद खान और इम्तियाज खान के पिता थे। अमर, मेमदीदी और नाज़नीन जैसी फ़िल्मों में उनके उल्लेखनीय काम हैं। उन्होंने दिलीप कुमार और मधुबाला के साथ कई फ़िल्मों में काम किया। 

जयंत लंबे कद के थे और उनकी आवाज बहुत गहरी थी। उन्होंने अपने स्टेज नाम जयंत के तहत कई भारतीय फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने विजय भट्ट की पहली गुजराती फिल्म संसार लीला (1933) में काम किया। जयंत नाम भी उन्हें निर्देशक और निर्माता विजय भट्ट ने दिया था। उन्होंने बॉम्बे मेल (1935), चैलेंज (1936), हिज हाइनेस (1937) और स्टेट एक्सप्रेस (1938) जैसी कई फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई।

एक्टर जयंत अपने दोनो बेटे अमजद खान और इम्तियाज़ के साथ

निजी जीवन:-जयंत शादीशुदा थे और उनके बच्चे अमजद खान (गब्बर सिंह फेम) और इम्तियाज खान थे। वे शादाब खान, अहलम खान, सीमाब खान और आयशा खान के दादा और शैला खान और कृतिका देसाई खान (इम्तियाज की पत्नी) के ससुर थे।

स्टाइलिश जयंत अपने दोनो बेटों के साथ

मृत्यु:-जयंत की मृत्यु 2 जून 1975 को 60 वर्ष की आयु में बॉम्बे में उनके बेटे अमजद खान की सबसे सफल फिल्म शोले की रिलीज से दो महीने पहले हुई। गले के कैंसर के कारण उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें मुंबई के बांद्रा पश्चिम के नौपाड़ा कब्रिस्तान में दफनाया गया।

फिल्मी करियर:-लव एंड गॉड (1986) अमीर-ए-बसरा के रूप में

साइमन (1980) बरुंडी के रूप में

इंसानियत (1974) रघुवीर/दीवान के रूप में

मेरा गांव मेरा देश (1971) हवलदार मेजर जसवंत सिंह के रूप में

जाने अनजाने (1971) शंकर के रूप में

रेशमा और शेरा (1971) सगत सिंह के रूप में

हीर रांझा (1970) चौधरी के रूप में

माँ और ममता (1970) कासिम के रूप में

आग और दाग (1970) श्याम के रूप में

एक नन्ही मुन्नी लड़की थी (1970)

इंस्पेक्टर (1970) मार्शल के रूप में

माई लव (1970)

अनमोल मोती (1969)

दो रास्ते (1969) खान के रूप में

सपनों का सौदागर (1968) ठाकुर राय बहादुर हरनाम सिंह के रूप में

सुंघुरश (1968) भवानी के रूप में प्रसाद

सगाई (1966) द्वारकानाथ के रूप में

ठाकुर जरनैल सिंह (1966)

हिमालय की गोद में (1965) लखन सिंह के रूप में

शेर दिल (1965)

बेटी बेटे (1964) रघु के रूप में

अप्रैल फूल (1964) लाल के रूप में

हकीकत (1964) ब्रिगेडियर सिंह के रूप में

लीडर (1964) दीवान महेंद्रनाथ के रूप में

जिंदगी (1964) शेर खान के रूप में

सन ऑफ इंडिया (1962) जंग बहादुर "जे.बी." के रूप में 

बड़ा आदमी (1961) 

झुमरू (1961) द्वारकानाथ के रूप में 

माया (1961) रणवीर दादा के रूप में 

मेमदीदी (1961) शेर मोहम्मद खान "शेरा" के रूप में

 परख (1960) राय बहादुर तांडव तरफदार के रूप में 

कल हमारा है (1959) सेठ हीरालाल के रूप में 

मधुमती (1958) पवन राजा के रूप में 

नया अंदाज (1956) 

बाप रे बाप (1955) राजा बहादुर मोती सागर के रूप में 

इंसानियत (1955) झंगूरा के रूप में 

मुसाफिर खाना (1955) 

तांगेवाली (1955) 

यास्मीन (1955) 

अमर (1954)

 संकट छलिया के रूप में वतन (1954) 

अमर कीर्तन (1954)

 रेल का डिब्बा (1953) 

नाजनीन (1951) 

सैयां (1951)

परदेस (1950) राणा साहब के रूप में

चार दिन (1949)

दुलारी (1949) गिरिजा शंकर के रूप में

ज़ेवराट (1949)

रूप नगर (1947)

माँ बाप की लाज (1946)

शिरीन फरहाद (1945)

पूंजी (1943)

अपनी नगरिया (1940)

सरदार (1940)

सरदार-ए-अव्वल (1939)

स्टेट एक्सप्रेस (1938) प्रिंस के रूप में

आज़ाद वीर (1936)

स्नेहलता (1936)

बॉम्बे मेल (1935)

लाल चिट्टा (1935)

बंबई की सेठानी (1935)

संसार लीला (1933)



Comments

Popular posts from this blog

गया के इस हवेली से है संजय दत्त-नरगिस का संबंध, कभी जद्दनबाई के यहां सजती थी ठुमरी की महफिल

क्रिकेटर से बना फिल्मस्टार , फिर आया कंगाली का दौर ,पैसे पैसे को मोहताज हुआ एक्टर..!!

किशोर कुमार का भांजा बना सुपरस्टार