इंडो पाक पार्टिशन मे पाकिस्तान से जबलपुर (इंडिया) आकर, फिल्मी करियर मे बड़ा नाम कमाया इस एक्टर ने ...!!!
इंडो पाक पार्टिशन मे पाकिस्तान से जबलपुर (इंडिया) आकर, फिल्मी करियर मे बड़ा नाम कमाया इस एक्टर ने ...!!!
WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: May 06, 2024, 12:30 PM IST
राजेंद्र नाथ की एक गलती ने उन्हें बना दिया कंगाल, फिर पाई-पाई के हो गए मोहताज गुमनामी में बीते आखिर दिन
राजेंद्र नाथ का जन्म 8 जून 1931 को टीकमगढ़ में हुआ था, जो अब मध्य प्रदेश में है। उनका परिवार पेशावर के करीमपुरा इलाके से था, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में बस गया। उन्होंने दरबार कॉलेज, रीवा में पढ़ाई की, जहाँ अर्जुन सिंह (एक कांग्रेसी राजनेता) और आर.पी. अग्रवाल उनके सहपाठी थे।
राजेंद्र के बड़े भाई प्रेम नाथ मुंबई चले गए और एक अभिनेता बन गए, इसलिए राजेंद्र 1949 में उनके साथ जुड़ गए। वे राज कपूर और शशि कपूर के अच्छे दोस्त थे। राजेंद्र और प्रेम की बहन कृष्णा ने अभिनेता-निर्देशक राज कपूर से शादी की। उनके एक और भाई नरेंद्र नाथ भी थे, जो एक अभिनेता बन गए, जिन्होंने आमतौर पर फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई।
| एक्टर प्रेमनाथ अपने जीजाजी प्रेम चोपड़ा के साथ |
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| राज कपूर और कृष्णा मल्होत्रा (एक्टर प्रेमनाथ,राजेंद्र नाथ ,नरेन्द्र नाथ की बहन) |
राजेंद्र, जिन्हें पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी, ने कॉलेज छोड़ दिया और अपने भाई की तरह फिल्मों में काम करने के लिए बॉम्बे आ गए। उन्होंने पृथ्वी थिएटर में पठान और शकुंतला जैसे कुछ नाटक किए। यहीं पर उनकी शम्मी कपूर से नज़दीकी हुई।
हिन्दी सिनेमा में 60 के दशक में जॉनी वॉकर और महमूद जैसे कॉमेडियन का दबदबा हुआ करता था, लेकिन इन्हीं कॉमेडियन के बीच एक और अभिनेता ने अपनी जगह बनाई जिसकी अदाओं भर से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. वह पर्दे पर खामोश भी होता तो लोगों की हंसी नहीं रुकती थी... इस एक्टर का नाम था राजेंद्र नाथ... राजेंद्र नाथ मशहूर स्टार प्रेम नाथ के भाई और राज कपूर के साले थे. राजेंद्र नाथ के फिल्मी दुनिया में कनेक्शन तो अच्छे थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें काम पाने के लिए लंबे वक्त तक स्ट्रगल करना पड़ा था और जब उन्हें कामयाबी मिली तो एक ऐसी गलती कर बैठे कि जिंदगी का आखिरी वक्त कंगाली और गुमनामी में बिताना पड़ा.
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| एक्टर प्रेमनाथ अपने दोनो बेटों ,बीवी और बहु के साथ |
राजेंद्र नाथ के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन बड़े भाई प्रेम नाथ के फिल्मों में इंट्रेस्ट को देखते हुए उनकी दिलचस्पी भी इस ओर हो चली. राजेंद्र नाथ 1947 में मुंबई पहुंचे और थिएटर करना शुरू किया. उन्होंने पृथ्वी थिएटर में कई नाटकों में काम किया और फिल्मों में काम की तलाश करने लगे. करीब 10 साल तक राजेंद्र नाथ को सिर्फ छोटे-मोटे रोल ही मिलते रहे. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उन्हें 'जब-जब फूल खिले' में काम मिला और इस फिल्म ने उनका निभाया हुआ पोपटलाल का किरदार इतना मशहूर हुआ कि वह पोपटलाल के नाम से ही फेमस हो गए और उनके करियर की गाड़ी चल पड़ी.
लेकिन राजेंद्र नाथ की जिंदगी में अच्छा वक्त लंबे समय तक नहीं रहा. 1974 में उन्होंने फिल्म निर्माण में उतरने का फैसला किया और रणधीर कपूर और नीतू सिंह को अपनी फिल्म के लिए साइन किया. ओवर बजट होने के कारण फिल्म की शूटिंग 10 दिन में ही रुक गई और राजेंद्र नाथ के ऊपर लाखों रुपये का कर्ज चढ़ा दिया, जिसे उतारने में एक्टर पूरी तरह कंगाल हो गया. साल 1991 में राजेंद्रनाथ के बड़े भाई प्रेम नाथ का निधन हो गया और जिसके बाद एक्टर ने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया और अकेले रहने लगे. राजेंद्र नाथ का आखिरी वक्त गुमनामी के अंधेरे में बीता और गुमनामी में ही 2008 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
#RajendraNath



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