करोड़पति फिल्मस्टार जिसको बंगले, कार बेचकर चाल मे रहना पड़ा...!!!


करोड़पति फिल्मस्टार जिसको बंगले, कार बेचकर चाल मे रहना पड़ा...!!!

WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: April 05, 2024, 12:30 PM IST

Bharat Bhushan: 1950 के दशक के सुपरसितारों में भारत भूषण अव्वल थे. कई लोग उन्हें अपने समय के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में गिनते थे. वह रोमांटिक हीरो थे और उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में थी. राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार जैसे सुपरस्टार्स की मौजूदगी में भारत भूषण ने अपनी अलग पहचान बनाई थी. 

फिल्म् "हमारी दुनिया" मे भारत भूषण ,आशा माथुर के साथ

उन्होंने अपने करियर में 30 से अधिक फिल्मों में काम किया और बैजू बावरा (1952), आनंद मठ (1952), मिर्जा गालिब (1954) और मुड़ मुड़ के ना देख (1960) जैसी हिट फिल्में दीं. लेकिन फिल्म निर्माता बनने की जिद और जुए की गलत आदत ने उन्हें बर्बाद कर दिया. अपने समय के सबसे अमीर अभिनेताओं में से एक होने के बावजूद, उन्होंने फिल्म निर्माण और जुए में मेहनत की गाढ़ी कमाई गंवा दी. बेहद गरीबी में उनकी मृत्यु हुई.

हर हीरोइन का हीरो

भूषण 1920 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में थे और अलीगढ़ में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिनय में हाथ आजमाने के लिए मुंबई आए.इनके पिता पेशे से वकील थे जो कि फिल्मो से सख्त नफरत करते थे।वो भारत भूषण को एक काबिल वकील् बनाना चाहते थे। लेकिन भारत भूषण एक्टर ही बनना चाहते थे  भारत भूषण ने 1941 में चित्रलेखा के साथ अपनी शुरुआत की. उनकी पहली हिट मीना कुमारी के साथ बैजू बावरा थी. इसके बाद उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु (1954) और बरसात की रात (1960) जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया. बैजू बावरा ने भारत भूषण को घर-घर में मशहूर कर दिया. संजय लीला भंसाली आज इसी बैजू बावरा की कहानी पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं. इस कहानी में भारत भूषण ने बैजू नाम केऐसे संगीतकार की भूमिका निभाई जिसने संगीत सम्राट तानसेन को चुनौती दी थी. भारत भूषण ने अपने समय की लगभग सभी लोकप्रिय अभिनेत्रियों के साथ काम किया. जिनमें गीता बाली (सुहाग रात), निरूपा रॉय (औरत तेरी यही कहानी), नरगिस (सागर) और मधुबाला (फागुन) शामिल हैं.

भारत भूषण अपनी दोनो बेटियों के साथ

बेचनी पड़ी प्रॉपर्टी

भारत भूषण बैजू बावरा के बाद मिली भारी सफलता संभाल नहीं सके. उन्होंने अपने भाई के साथ प्रोडक्शन में उतरने का फैसला किया और बड़ा घाटा उठाया. वह दिवालिया हो गए. एक समय भारत भूषण मुंबई में कई बंगलों के मालिक थे. शानदार कारों में घूमते थे. लेकिन निर्माता बनने का फैसला गलत साबित हुआ. वह जुए में भी काफी पैसा और प्रॉपर्टी हार गए. कर्ज चुकाने के लिए भारत भूषण ने अपनी अधिकांश संपत्ति बेच दी और एक चाल में रहने लगे. बाद के दौर में अपना गुजारा चलाने के लिए उन्होंने कुछ फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट के रूप में भी काम किया.  

साल 1950 में जब कार्टर रोड पर नौशाद साहब के पड़ोस में भारत भूषण ने एक बंगला खरीदा तो इसे 'भूत बंगला' कहा जाता था.

वरिष्ठ पत्रकार शांति स्वरूप कहते हैं, "यह बंगला खरीदते ही भारत भूषण की किस्मत चमकी. शुरू में कामयाबी मिली लेकिन बाद में पैसो की तंगी की वजह से उन्होंने बंगला राजेंद्र कुमार को बेच दिया.  

कहा जाता है कि इस घर को खरीदने के लिए राजेंद्र कुमार ने बीआर चोपड़ा की 'कानून' और दूसरी फिल्में साइन कीं.

उन्हें भी यहां खूब कामयाबी मिली, कई सुपर हिट फिल्में दीं. इसके बाद ही वे जुबली कुमार के नाम से जाने जाने लगे ,   

पत्रकार शांति स्वरूप बताते हैं कि बाद में राजेंद्र कुमार ने दूसरा बंगला बना लिया और वहां चले गए.


1970 में उन्होंने एक बांग्ला राजेश खन्ना को बेच दिया.


दिलचस्प है कि राजेश खन्ना ने भी इस बंगले को खरीदने के लिए 'हाथी मेरे साथी' के निर्माता से रकम एडवांस ली. इस बंगले का नाम उन्होंने 'आशीर्वाद' नाम रखा.


'हाथी मेरे साथी' की पेंटिंग इस बंगले की दीवारों पर आखिरी दिन तक रही. इसी बंगले में रहते हुए उन्होंने कई सुपर हिट फिल्में दीं.

राजेश खन्ना का आशीर्वाद बंगला ,कभी भारत भूषण इसके मालिक हुआ करते थे।


राजेश खन्ना इसमें अंत तक रहे. इसे राजेश खन्ना की बेटियों ट्विंकल और रिंकी ने अलकार्गो के चेयरमैन शशि किरण शेट्टी को बेच दिया.

70 साल पुराने ‘आशीर्वाद’ बंगले को शशि किरण शेट्टी ने तुड़वा दिया और एक फ्लैट्स बना दिये.

भारत भूषण की बेटी अपराजिता ,मंदोदरी के किरदार मे

उनकी बेटी अपराजिता भी एक एक्ट्रेस थी 1987 मे रामायण tv  सीरियल मे मंदोदरी का किरदार निभाया था ,वो बताती है कि पिताजी ( भारत भूषण)  के तीन  बंगले  थे और करीब एक लाख किताबों का संग्रह था। लेकिन जब आर्थिक संकट आया तो सब कुछ बेचना पड़ा। 1941 मे फिल्म चित्रलेखा, भक्त कबीर के हिट  होते ही  पिताजी ( भारत भूषण ) ने सांताक्रूज़ मे आशा पारेख के बगल वाला बंगला  खरीदा था ,लेकिन बैजू बाबरा की आपार सफलता के बाद पिताजी ने पाली हिल्स पर इससे भी बड़ा बंगला  खरीदा और फिर हम लोग वही  शिफ्ट हो गये।

भारत भूषण अपनी बेटी अनुराधा के साथ

 पिताजी उस दौर के सबसे हैंडसम और स्टाइलिश एक्टर हुआ करते थे ,उन्हे कारो और कपड़ो का बोहोत शौक था।

आखिरकार 27 जनवरी 1992 को 72 वर्ष की आयु में अत्यंत गरीबी में उनकी मृत्यु हो गई.


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