स्पॉट बॉय से फिल्मो मे मैन विलेन बनने का सफर ...!!!

स्पॉट बॉय से फिल्मो मे मैन विलेन बनने का सफर ...!!!

WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: April 18, 2024, 12:30 PM IST

90s का वह विलेन, जिसने दो दशकों में 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, फिल्मी डायलॉग ऐसे बोलते थे, मानो शैतान शायरी कर रहा हो. बॉलीवुड उन्हें भूल गया, लेकिन दर्शक आज भी दिल से याद करते हैं. फिल्मों में कभी भ्रष्ट नेता तो कभी पुलिसवाले बने. आमिर खान और रजनीकांत के पिता का रोल भी निभाया. 'गदर' में काजी बने इशरत अली आज अध्यात्म की दुनिया में लीन हैं. वे 5 बार के नमाजी हैं. वे स्पॉट ब्वॉय से कैसे बॉलीवुड के मशहूर विलेन बने? इसके पीछे बड़ी अनूठी कहानी है.

अगर आप 'गदर' मूवी के फैन हैं, तो आपको वह आइकॉनिक सीन भी याद होगा, जिसमें एक काजी तारा सिंह को मुस्लिम धर्म कुबूल करवाने से पहले सवाल-जवाब करता दिखाई देता है. काजी के भेष में मशहूर एक्टर इशरत अली (Ishrat Ali) हैं, जिन्होंने 'गदर' और 'क्रांतिवीर' जैसी दर्जनों यादगार फिल्मों में विलेन के रोल निभाए. इशरत अली शुरू में एक स्पॉट ब्वॉय थे.

नई दिल्ली: अगर आप 'गदर' मूवी के फैन हैं, तो आपको वह आइकॉनिक सीन भी याद होगा, जिसमें एक काजी तारा सिंह को मुस्लिम धर्म कुबूल करवाने से पहले सवाल-जवाब करता दिखाई देता है. काजी के भेष में मशहूर एक्टर इशरत अली (Ishrat Ali) हैं, जिन्होंने 'गदर' और 'क्रांतिवीर' जैसी दर्जनों यादगार फिल्मों में विलेन के रोल निभाए. इशरत अली शुरू में एक स्पॉट ब्वॉय थे.

इशरत अली जब छोटे थे, तब दोस्तों के बीच फिल्मों के डायलॉग बोलते थे. दोस्त उनके अभिनय कौशल से प्रभावित होकर उन्हें एक्टर बनने की सलाह देते थे. इशरत उनकी बातों को मजाक में लेते, लेकिन जब दोस्त एक ही बात बार-बार दोहराने लगे, तो उन्होंने एक्टर बनने की ठान ली. इशरत अली के साथ मुश्किल यह थी कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बंटाते थे, जो तब और बढ़ गई, जब उनके पिता का देहांत हो गया. घर को संभालने और बहन की शादी की जिम्मेदारी इशरत अली पर आ गई. उन्होंने निश्चय किया कि पहले वह घर-परिवार को संभालेंगे, फिर बहन का ब्याह करवाएंगे, इसके बाद एक्टर बनने के सपने को पूरा करेंगे.

इशरत अली जब छोटे थे, तब दोस्तों के बीच फिल्मों के डायलॉग बोलते थे. दोस्त उनके अभिनय कौशल से प्रभावित होकर उन्हें एक्टर बनने की सलाह देते थे. इशरत उनकी बातों को मजाक में लेते, लेकिन जब दोस्त एक ही बात बार-बार दोहराने लगे, तो उन्होंने एक्टर बनने की ठान ली. इशरत अली के साथ मुश्किल यह थी कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बंटाते थे, जो तब और बढ़ गई, जब उनके पिता का देहांत हो गया. घर को संभालने और बहन की शादी की जिम्मेदारी इशरत अली पर आ गई. उन्होंने निश्चय किया कि पहले वह घर-परिवार को संभालेंगे, फिर बहन का ब्याह करवाएंगे, इसके बाद एक्टर बनने के सपने को पूरा करेंगे.

 इशरत ने खुद से किए वचन को पूरा करने के बाद, बॉलीवुड का रुख किया. चूंकि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कोई नहीं जानता था, इसलिए वे हर तरह के काम के लिए तैयार रहे. खबरों की मानें, तो उन्हें अपने एक दोस्त की मदद से स्पॉट ब्वॉय का काम मिल गया. वे कैमरा यूनिट के सहायक के तौर पर काम करने लगे. इसका फायदा यह हुआ कि उन्हें करीब से फिल्म मेकिंग की बारीकियों को जानने-समझने का मौका मिला. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को इशरत के अभिनय के शौक के बारे में पता चला. एक दिन एक दोस्त ने इशरत को बताया कि दिलीप शंकर फिल्म 'काल चक्र' के लिए कलाकारों को खोज रहे हैं. इशरत भी ऑडिशन देने पहुंच गए. दिलीप शंकर उनके अभिनय से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें फिल्म में एक बड़ा रोल दे दिया. 

इशरत ने खुद से किए वचन को पूरा करने के बाद, बॉलीवुड का रुख किया. चूंकि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कोई नहीं जानता था, इसलिए वे हर तरह के काम के लिए तैयार रहे. खबरों की मानें, तो उन्हें अपने एक दोस्त की मदद से स्पॉट ब्वॉय का काम मिल गया. वे कैमरा यूनिट के सहायक के तौर पर काम करने लगे. इसका फायदा यह हुआ कि उन्हें करीब से फिल्म मेकिंग की बारीकियों को जानने-समझने का मौका मिला. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को इशरत के अभिनय के शौक के बारे में पता चला. एक दिन एक दोस्त ने इशरत को बताया कि दिलीप शंकर फिल्म 'काल चक्र' के लिए कलाकारों को खोज रहे हैं. इशरत भी ऑडिशन देने पहुंच गए. दिलीप शंकर उनके अभिनय से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें फिल्म में एक बड़ा रोल दे दिया.

 इशरत ने 1988 की फिल्म 'काल चक्र' में यशवंत कात्रे नाम के भ्रष्ट नेता का ऐसा दमदार रोल निभाया कि उन्हें कई फिल्मों में विलेन के रोल ऑफर होने लगे. उन्होंने 1990 की फिल्म 'तुम मेरे हो' में आमिर खान के पिता का किरदार निभाया था. 'आतंक ही आतंक' में उन्हें रजनीकांत के पिता के रोल में भी देखा गया था. 1994 की फिल्म 'आ गले लग जा' में इशरत ने साइको किलर का धांसू रोल निभाया था, जिसे दर्शक आज तक भूले नहीं हैं.

इशरत ने 1988 की फिल्म 'काल चक्र' में यशवंत कात्रे नाम के भ्रष्ट नेता का ऐसा दमदार रोल निभाया कि उन्हें कई फिल्मों में विलेन के रोल ऑफर होने लगे. उन्होंने 1990 की फिल्म 'तुम मेरे हो' में आमिर खान के पिता का किरदार निभाया था. 'आतंक ही आतंक' में उन्हें रजनीकांत के पिता के रोल में भी देखा गया था. 1994 की फिल्म 'आ गले लग जा' में इशरत ने साइको किलर का धांसू रोल निभाया था, जिसे दर्शक आज तक भूले नहीं हैं. 

इशरत ने आगे चलकर 'क्रांतिवीर', 'आंदोलन', 'आतंक ही आतंक', 'गुंडा' और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी दर्जनों फिल्मों में उम्दा रोल निभाए. उनका डायलॉग बोलने का अंदाज बड़ा निराला था. 'गदर: एक प्रेम कथा' में काजी का रोल भुलाया नहीं जा सकता, फिर भी उन्हें बॉलीवुड की उपेक्षा का सामना करना पड़ा. उन्हें एक ही तरह के रोल मिले, जिससे शायद वे उकता गए थे. वेे आखिरी बार 2014 में आई एक फिल्म में नजर आए थे. वे करीब 20 सालों तक फिल्मी दुनिया में एक्टिव थे, इस दौरान उन्होंने डेढ़ सौ से ज्यादा छोटी-बड़ी फिल्में कीं. उन्होंने सब टीवी के सीरियल 'चिड़ियाघर' में भी काम किया था. इशरत अली अब एक्टिंग की दुनिया से दूर, आध्यात्मिक जिंदगी जी रहे हैं. वे दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं.


इशरत ने आगे चलकर 'क्रांतिवीर', 'आंदोलन', 'आतंक ही आतंक', 'गुंडा' और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी दर्जनों फिल्मों में उम्दा रोल निभाए. उनका डायलॉग बोलने का अंदाज बड़ा निराला था. 'गदर: एक प्रेम कथा' में काजी का रोल भुलाया नहीं जा सकता, फिर भी उन्हें बॉलीवुड की उपेक्षा का सामना करना पड़ा. उन्हें एक ही तरह के रोल मिले, जिससे शायद वे उकता गए थे. वेे आखिरी बार 2014 में आई एक फिल्म में नजर आए थे. वे करीब 20 सालों तक फिल्मी दुनिया में एक्टिव थे, इस दौरान उन्होंने डेढ़ सौ से ज्यादा छोटी-बड़ी फिल्में कीं. उन्होंने सब टीवी के सीरियल 'चिड़ियाघर' में भी काम किया था. इशरत अली अब एक्टिंग की दुनिया से दूर, आध्यात्मिक जिंदगी जी रहे हैं. वे दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं

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