पिता की तरह विलेन ना बन पाया, लेकिन एड की दुनिया का बेताज बादशाह है प्राण का ये बेटा...!!!
पिता की तरह विलेन ना बन पाया, लेकिन एड की दुनिया का बेताज बादशाह है प्राण का ये बेटा...!!!
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| एक्टर प्राण अपने दोनो बेटे अरविन्द और सुनील सिकंद के साथ |
प्राण साहब की शख्सियत कुछ ऐसी थी कि जो भी उनके बारे में बात करता था, बस तारीफें ही करता था। फिर चाहे वो कोई कलाकार हो, इंडस्ट्री का कोई और बड़ा नाम हो, या फिर कोई रिश्तेदार हो। एक्ट्रेस आशा पारेख ने प्राण साहब के साथ 9 फिल्मों में काम किया था। प्राण साहब के बारे में एक दफा आशा पारेख जी ने कहा था कि पहली दफा जब उन्होंने प्राण साहब को देखा था तब उन्हें लगा था कि प्राण साहब शायद कम बोलते हैं। वो सैट के एक तरफ अपनी कुर्सी पर बैठे रहते थे और सबकुछ निहारते रहते थे। मगर जैसे-जैसे प्राण साहब के साथ वक्त गुज़रता गया तो उनसे बातें होने लगी। और उनके बारे में काफी कुछ जानने को मिलने लगा। प्राण साहब बहुत मिलनसार शख्सियत थे। और बहुत हंसी-मज़ाक करने वाले इंसान थे। उनके पास ऐसे-ऐसे दुर्लभ जोक्स व किस्से सुनाने हो हुआ करते थे, जिन्हें सुनकर बड़ा मज़ा आता था।
अभिनेता स्वर्गीय देवेन वर्मा जी ने तो एक दफा प्राण साहब और अपना एक बड़ा ही रोचक किस्सा सुनाया था। देवेन वर्मा और प्राण 'आजा मेरी जान' नामक एक फिल्म की शूटिंग गोवा में कर रहे थे। वो एक सप्सेंस थ्रिलर फिल्म थी। और देवेन वर्मा उस फिल्म में विलेन बने थे। गोवा के एक फाइव स्टार होटल में प्राण साहब और देवेन वर्मा को ठहराया गया था। होटल से कुछ ही दूरी पर फिल्म के क्लाइमैक्स के कुछ सीन्स फिल्माए जा रहे थे। उस दिन देवेन वर्मा शूटिंग करते हुए काफी थक गए थे। इसलिए जब शाम को पैकअप हुआ तो वो बिना मेकअप उतारे ही होटल की तरफ चल दिए।
देवेन वर्मा के कपड़ों नकली ख़ून भी बिखरा हुआ था जो कि शूटिंग के वक्त इस्तेमाल किया गया था। देवेन जैसे ही होटल के लाउंज में पहुंचे, प्राण ने उन्हें देखा और ज़ोर से चिल्लाए,"देखो-देखो, इस आदमी को किसी ने गोली मार दी है।" प्राण साहब ने वो बात अंग्रेजी में कही थी। इत्तेफाक से लाउंज में कुछ विदेशी महिलाएं बैठी थी। उन्होंने जब गोली शब्द सुना और देवेन वर्मा को देखा तो वो घबरा गई और भागने लगी। तब प्राण ने उन्हें रोका और उनसे माफी मांगते हुए कहा कि ये तो बस एक मज़ाक था। उस आदमी को गोली नहीं लगी है। वो नकली ख़ून है। वो एक शूटिंग करके आया है। बकौल देवेन वर्मा, उस वक्त माहौल बड़ा ही मज़ेदार हो गया था।
शम्मी कपूर साहब ने एक दफा प्राण साहब के बारे में कहा था,"प्राण बहुत ही अच्छे आदमी हैं। हमारी शादी से पहले से ही गीता बाली जी प्राण साहब को जानती थी। वो प्राण साहब के साथ काम कर चुकी थी। जब गीता जी के माता-पिता की मृत्यु हुई थी तब प्राण साहब उनके साथ मजबूती से खड़े रहे थे। और जब गीता जी का देहांत हुआ तब मेरा तरह से साथ निभाया। हर काम में मेरी मदद की। प्राण हर समय लोगों की मदद को तैयार रहते हैं।"
मनोज कुमार जी ने प्राण साहब के बारे में कहा था,"मेरे पिता की मृत्यु के कुछ ही दिन बाद मेरी माता जी की भी मृत्यु हो गई थी। मैं उन दिनों बहुत टूटा हुआ था। प्राण ने किसी अभिभावक की तरह मुझे संभाला। हर तरह से प्राण साहब ने मुझे सहारा दिया। ऐसा तो कोई सच्चा और कुशल दोस्त ही कर सकता है। दुख की उन घड़ियों में वो मुझसे खूब बातें करते थे। मेरा ध्यान बंटाने का प्रयत्न करते थे। मुझे सहज रखने की पूरी कोशिश करते थे। प्राण साहब की खासियत है कि वो औरों का दुख तो ले लेते हैं। मगर अपना दुख किसी को ज़ाहिर नहीं करते थे।"
अक्सर देखा गया है कि बाप अगर बड़ा फिल्म स्टार है तो लोग उसके बच्चों से भी उसी तरह की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन कई बार ये उम्मीदें टूट जाती हैं। जरूरी तो नहीं कि अगर बाप बड़ा स्टार है तो बेटा भी उतना ही बड़ा एक्टर बने...और फिर ये भी जरूरी नहीं कि बेटा भी बाप की तरह ही एक्टर बने।
बॉलीवुड में कई ऐसे एक्टर हैं जो जिन्होंने अपने जमाने में फिल्मी परदे से लेकर लोगों के दिलों पर राज किया, लेकिन उनके बच्चे फिल्मी दुनिया में आकर फ्लॉप हो गए। हालांकि उन्होंने बाकी क्षेत्रों में खूब नाम कमाया।
अब एक्टर प्राण के बेटे को ही ले लीजिए। प्राण अपनी बेहतरीन अदाकारी और उम्दा डायलॉग डिलिवरी के चलते हिंदी सिनेमा के सबसे कद्दावर अभिनेताओं में से एक थे। वो एक ऐसे कलाकार रहे जिन्होंने हीरो से लेकर विलेन के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया।
उनके टैलेंट को दादा साहेब फाल्के जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, लेकिन क्या आप उनके बेटे के बारे में कुछ जानते हैं ? वो क्या करते हैं कुछ पता है ?
उनके टैलेंट को दादा साहेब फाल्के जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, लेकिन क्या आप उनके बेटे के बारे में कुछ जानते हैं ? वो क्या करते हैं कुछ पता है ?
सुनील सिकंद अहलूवालिया एक भारतीय फिल्म निर्देशक और दिग्गज अभिनेता प्राण के बेटे हैं । उन्होंने 1984 में अपनी पहली फिल्म फरिश्ता और 1991 में दूसरी फिल्म लक्षमन रेखा का निर्देशन किया जिसमे जैकी श्रॉफ ,नसीरुद्दीन शाह,शम्मी कपूर ,डेनी और उनके पिता प्राण ने अभिनय किया था । प्राण चाहते थे उनके बेटे भी उनकी तरह बॉलीवुड का बड़े स्टार बने. लेकिन किस्मत को और ही मंजूर था. प्राण के दो बेटे-सुनील सिकंद-अरविंद सिकंद और एक बेटी-पिंकी सिकंद हैं. तीनों अब लाइमलाइट से दूर हैं. हालांकि छोटे बेटे सुनील सिकंद ने 80 के दशक में कई फिल्मों जूनियर डायरेक्टर के तौर पर काम किया. लेकिन बहुत जल्द इससे भी दूसरी बना ली।

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