पिता बॉलीवुड मे विलेन का रोल किया करते थे और बेटा बन गया JNU का प्रो-वाइस चांसलर ....!!!

पिता बॉलीवुड मे विलेन का रोल किया करते थे और बेटा बन गया JNU का प्रो-वाइस  चांसलर ....!!!

आप सभी महान दिवंगत अभिनेता कमल कपूर को जानते ही होंगे ।जिन्होंने बॉलीवुड मे मूलतः विलन का रोल किये है। कमल कपूर का जन्म पेशावर पाकिस्तान मे हुआ था। ये एक्टर पृथ्वीराज कपूर के मोसेरे भाई थे,अर्थात पृथ्वीराज कपूर और कमल कपूर की मा आपस मे बहने थी।

एक्टर कमल कपूर ( डॉ कपिल कपूर के पिता)
WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: March 20, 2024, 12:30 PM IST
 राज कपूर,शशि  कपूर और शम्मी कपूर ,पृथ्वीराज कपूर के पुत्रगण है । इस तरह से कमल कपूर इन तीनो के चाचा लगेंगे। कालांतर मे शादी के बाद  कमल कपूर  पांच बच्चे के पिता बने जिसमे  दो बेटिया और 3 बेटे शामिल है । इनकी एक बेटी की शादी मशहूर फिल्म मेकर रमेश बहल से हुई है और इस वजह से  गोल्डी बहल की माँ, सोनाली बेंद्रे की सासु माँ  है। कमल कपूर ने सीता और गीता,डान, चोर मचाये शोर ,ब्लैकमेल,दीवार,अमर अकबर एंथोनी, हम किसी से कम नहीं ,नास्तिक ,मर्द,तूफ़ान ,इंद्रजीत इत्यादि फिल्मो मे काम किया है। कमल कपूर के तीन पुत्रो मे से एक पुत्र का नाम कपिल कपूर है ,जो कि  दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो वाईस चांसलर रह चुके है। जिस परिवार की लगभग हर जनरेशन मे 2-4 लोग बॉलीवुड से जुड़े हो और उसी फॅमिली से कोई ऐसा हाई फाई एडुकेटेड बंदा ग्रोन उप हो जाए।ये अपने आप मे एक बोहोत आश्चर्या की बात है। अगर इनके रिश्ते नातो को समझे तो कपिल कपूर एक तरह से एक्टर रणबीर कपूर के दादाजी लगेंगे ।और आपको जानकर आश्चर्या होगा कि रणबीर कपूर सिर्फ बारहवीं तक पड़े लिखे है। 

डॉ कपिल कपूर भारतीय बौद्धिक परम्परा के प्रतिनिधि विद्वान हैं। वे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के भूतपूर्व उपकुलपति रह चुके हैं। 2018 में, उन्हें शिमला में भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (IIAS) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इससे पहले, वह वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के चांसलर थे।

भारत सरकार ने उन्हें 2023 में पद्म भूषण के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया।

डॉ कपिल कपूर पिछले ५२ वर्षों से शिक्षण के क्षेत्र में हैं। उनके मार्गदर्शन में ४१ शोधार्थियों को पीएचडी एवं ३६ को एम-फिल की उपाधि मिल चुकी है। १९९६ से १९९९ तक वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन विद्यालय के डीन रहे तथा १९९९ से २००२ तक इस विश्वविद्यालय के रेक्टर रहे। उनकी शिक्षण एवं अनुसंधान गतिविधियों में साहित्यिक एवं भाषायी सिद्धान्त (भारतीय एवं पाश्चात्य), भाषा-दर्शन, १९वीं शताब्दी के ब्रिटेन का जनजीवन, साहित्य एवं विचार, भारतीय बौद्धिक परम्पराएँ, आदि शामिल हैं। इन विषयों पर उन्होने जमकर लिखा है। सन २००५ में वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए।

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