पिता मजबूरी मे ईरान से भारत आये और बेटा बॉलीवुड मे सुपरस्टार बन गया...!!
पिता मजबूरी मे ईरान से भारत आये और बेटा बॉलीवुड मे सुपरस्टार बन गया...!!
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| आगा शूटिंग के दौरान |
WRITTEN BY Ved Kumar | Updated: Mar 10, 2024, 06:08 AM IST
आगाजन् बैग (21 मार्च 1914 - 30 अप्रैल 1992) बॉलीवुड फिल्मों के एक भारतीय अभिनेता थे। इनके पिता ब्रिटिशकाल मे ईरान से भारत आये थे उन दिनों इरान मे राजनीतिक उठल - पुथल का माहौल था,देश मे आराजकता फेल रही थी ,आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का भी अभाव था , व्यवासायिक स्थिरता का भी अभाव था , अतः आगा के पिता भारत आ गये। जानकार बताते है कि कुछ समय के लिए आगा के पिता को मजदूरी भी करनी पड़ी, आगा हास्य भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे और उन्होंने खुद को बॉब होप की अभिनय शैली पर आधारित किया।उन्होंने 1935 से 1986 के बीच अपने करियर में 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया, उनके बेटे जलाल आगा भी एक अभिनेता बन गए, जिन्हें मुख्य रूप से शोले (1975) में महबूबा महबूबा गाने के लिए जाना जाता है।
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| आगा अपने पुत्र एक्टर जलाल आगा के साथ |
आगा बेग का जन्म 21 मार्च 1914 को ब्रिटिश भारत के पुणे के फातिमा नगर में हुआ था। उनके पिता मूल रूप से ईरान से थे और पुणे में बस गए थे, लेकिन रोजगार की तलाश में उन्हें पुणे छोड़कर बॉम्बे जाना पड़ा। आगा ने कबूल किया कि वह सिर्फ़ तीन दिन के लिए स्कूल गए थे, "फीस भरने के लिए पैसे नहीं होते थे इस वजह से स्कूल छोड़ दिया"।
उन्होंने पूना रेस कोर्स के आसपास "घूमने" में समय बिताया क्योंकि वह एक जॉकी(घुड़ सवार) बनना चाहते थे और घोड़ों से प्यार करते थे। आगा बॉम्बे आए और अपने पड़ोस के नाटक समूह में शामिल हो गए। अभिनय में उनकी रुचि उन्हें फिल्मों में ले गई, जहाँ 1933 में उन्होंने कंवल मूवीटोन में एक प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में शुरुआत की।
आगा की पहली फ़िल्म कंवल मूवीटोन की स्त्री धर्म थी, जिसे पेंटेड सिन (1935) भी कहा जाता है, जिसमें मेहताब और नज़ीर ने अभिनय किया था। हालाँकि, उनकी फ़िल्में कारवान-ए-हुस्न (1935), वाडिया मूवीटोन की रंगीला मज़दूर (1938) और अनुराधा (1940) ने उन्हें एक हास्य अभिनेता के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने किकुभाई देसाई (मनमोहन देसाई के पिता) की सर्कस की सुंदरी (1941) में अभिनय किया, जो काफ़ी लोकप्रिय रही और इससे उन्हें मुकाबला (1942), लहरी कैमरामैन (1944) और टैक्सी ड्राइवर (1944) जैसी फ़िल्मों में मुख्य भूमिकाएँ पाने में मदद मिली। उनके सबसे सक्रिय वर्ष 1930 से 1980 के दशक तक थे।
समय बीतता गया और आगा साहब तीन बेटियों और एक बेटे के पिता बने।
शाहनाज़ नामक इनकी एक बेटी का विवाह एक्टर,डायरेक्टर -टीनू आनंद के साथ हुआ।
फिल्मोग्राफी :-
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